मत मरो इसे ये मै हु
नहीं इसे भी मत मरो
ये भी मै हु
तुम क्यों मरते हो भाई
तुम भी तो मै हु
मै खुद से ही चिढने लगा हु
पिटता हु अपने ही हाथो,
मेरा सर ब्राहमण है
हाथ षात्रीय ,पेट वैश्य
और पैर शुद्र
साजिश है मेरे सर,
हाथ और पेट की
मेरे पैरों को काटने की
मै खुद का बैरी होगया हु
अब मै धर्मो में बाँट चूका हु
मै हिन्दू हु , मुस्लमान हु,
सिख हूँ , ईसाई हु
मै अपने अंगो को
परायों की तरह देखता हु
अब मै खुद को नहीं छोड़ूगा
मेरा पेट बिमान होगया है
सब कुछ खजाना चाहता है
शामिल है उस के साथ
मेरा सर भी
क्यों की सब कुछ
मुह से ही तो होकर गुजरता है
मेरे हाथ और पैर
ठगा सा महसूस करते है
मेरे हाथ घोंट देंगे मेरा गला
घोंप देंगे चाक़ू मेरे पेट में
मै खुद के टूकडे टूकडे कर डालूँगा
चल पड़ा हूँ मै
आत्महत्या करने
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