हर व्यक्ति जो जिन्दा है आवाज़ दे
जागने का सबको वो पैगाम दे
सूनी पड़ी है धरा कब्रिस्तान सी
चीखो के हर आँख को खुल जाने दे
उठने दो लहरों को ऊँचा इतना
तारों को संग उन के बह जाने दे
लगाओ आग धरा पे ऐसी
के उसमे सूर्य को जल जाने दे
बहाने दो गंगा की धार को हर एक इंच पर
देखो बात सब के पाप को धुल जाने दे रहारहा
धो रहा है सदियों से जो ईंटे
उस मैले कुचैले मजदूर को नहाने दे
आने दो भूचाल ऐसा
काले कल को मिटटी में मिल जाने दे
और जागने के बाद सब के
नया घरोंदा फिर बसाने दे

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