ये दग़ाबाज़ी बड़ी सफाई से करती है
Wednesday, February 8, 2017
बनाली है इक सड़क
चलने के लिए अपने हिसाब से
कुछ मौका परस्त लोगों ने
इस सड़क के इक तरफ
दरख़्त हैं , हरियाली है,
ऐशो आराम है, ऊँची इमारतें
गाड़ियां, खुशाली है!
दूसरी तरफ
रेत है, बंजर है,
सूखा है, बदहाली है
समाज का डर, पसीना,
रोटी की दौड़, तंगहाली है!
इस सड़क से ग़ुज़र कर
सिंहासन तक पहुंचने मत देना उन को
उखाड़ दो सारा डाम्बर
बिखेर दो बजरियां
मिल जाने दो
बदहाली में खुशाली को
उगजाने दो बंजर में
हरियाली को
Monday, May 7, 2012
Sunday, March 4, 2012
कभी आबाद नगर सी तुम
Monday, September 20, 2010
ज्योतीसर
मैंने देखा है ज्योतीसर को
घुमते हुए घंटो
पर देखा सिर्फ क्षण भर को
मैंने देखा है ज्योतीसर को
कहते है यहीं दिया था
गीता का उपदेश
श्री कृषण ने अर्जुन को
ख़त्म कर अधर्म को
धर्म के श्रुजन को
यहीं समझाया था भगवन ने
जन्म को मरण को
उतार कर दिखाया था
अपने ओढ़े हुए आवरण को
पर अब कहानी कुछ अलग सी है यहाँ
लोग आते हैं पूर्ण करने
अपने कुरुक्षेत्र के सफ़र को
दिख जायेंगे हजारों हज़ार पक्षी
उड़ते आसमान में
या अंडे से निकला बच्चा
घोंसले में फडफडाते अपने पर को
देख सकते हैं आप
सच और झूठ की दुकानों में
बढ़ते भूख के असर को
या देख सकते है
कीचड में कूद
कमल के फूल बेचते
गरीबी के बसर को
अर्जुन के विचारों की तरह
कमल के पात में
लुढ़कती बूँद
इधर से उधर
सोचती जाऊं मैं किधर को
एक बार फिर से
महसूस कराती हुई जरुरत
गीतोपदेश की
इस धरा, वसुंधरा
इस मनुष्य के घर को
मेरे क्षण भर के देखे हुए
आज के ज्योतीसर को
Tuesday, September 14, 2010
दो सर्दियाँ
अक्सर लुभाती हैं मुझे
कोहरे से छन कर आती
वो स्ट्रीट लाइट की रोशनी
भर देती है उमंग मेरे मन में
गिर्द बैठ कर आंच के तापना हाथों को
समाहित कर देता है एक ऊर्जा मुझ में
बहुत बहती है मुझे ये सर्दियाँ
सड़क किनारे नंगा बदन
ओंध पड़ा हुआ है
जल कर बुझ चुकी चिंगारियों पर
शायद थोड़ी गर्मी की आस में
चुभती है उसे
वो कोहरे से हो कर आती
स्ट्रीट लाइट की रोशनी
इस सर्दी से ठिठुर कर
दम न तोड़ दे उसका बेटा
वह कोसता है इश्वर को
उसे बिलकुल नहीं बहती ये सर्दियाँ
सोचता हूँ में अक्सर
कैसे आजाती है
और क्यों आजाती है , ये सर्दियाँ
एक बार में दो तरह से ?
Friday, August 27, 2010
आओ ख्वाब बुने
क्यों की ख्वाब हकीकत बनते है
और हकीकत है के हकीकत से अफसाने बनते है
अफसाने कुछ ऐसे बुनो
के इतिहास बनादो
और इतिहास की बुनियाद पर
भविष्य की तकदीर बनादो
तकदीर भी लेकिन मेहनत से बनती है
और मेहनत से ही सृस्ठी की गाड़ी सरकती है
गाड़ी जो जीवन की तुम्हे
है मंजिल तक पहुंचानी
तो आओ ख्वाब बुने
क्यों की ख्वाब हकीकत बनते है !
