Sunday, February 19, 2017

तू इश्क कुछ बेवफाई से करती है
ये दग़ाबाज़ी बड़ी सफाई से करती है

Wednesday, February 8, 2017

सड़क


बनाली है इक सड़क
चलने के लिए अपने हिसाब से
कुछ मौका परस्त लोगों ने

इस सड़क के इक तरफ
दरख़्त हैं , हरियाली है,
ऐशो आराम है, ऊँची इमारतें
गाड़ियां, खुशाली है!

दूसरी तरफ
रेत है, बंजर है,
सूखा है, बदहाली है
समाज का डर, पसीना,
रोटी की दौड़, तंगहाली है!

इस सड़क से ग़ुज़र कर
सिंहासन तक पहुंचने मत देना उन को
उखाड़ दो सारा डाम्बर
बिखेर दो बजरियां
मिल जाने दो
बदहाली में खुशाली को
उगजाने दो बंजर में
हरियाली को