Tuesday, February 23, 2010

आत्म हत्या

मत मरो इसे ये मै हु
नहीं इसे भी मत मरो
ये भी मै हु
तुम क्यों मरते हो भाई
तुम भी तो मै हु
मै खुद से ही चिढने लगा हु
पिटता हु अपने ही हाथो,
मेरा सर ब्राहमण है
हाथ षात्रीय ,पेट वैश्य
और पैर शुद्र
साजिश है मेरे सर,
हाथ और पेट की
मेरे पैरों को काटने की
मै खुद का बैरी होगया हु
अब मै धर्मो में बाँट चूका हु
मै हिन्दू हु , मुस्लमान हु,
सिख हूँ , ईसाई हु
मै अपने अंगो को
परायों की तरह देखता हु
अब मै खुद को नहीं छोड़ूगा
मेरा पेट बिमान होगया है
सब कुछ खजाना चाहता है
शामिल है उस के साथ
मेरा सर भी
क्यों की सब कुछ
मुह से ही तो होकर गुजरता है
मेरे हाथ और पैर
ठगा सा महसूस करते है
मेरे हाथ घोंट देंगे मेरा गला
घोंप देंगे चाक़ू मेरे पेट में
मै खुद के टूकडे टूकडे कर डालूँगा
चल पड़ा हूँ मै
आत्महत्या करने

Thursday, February 18, 2010

अब बदलने दो

हर व्यक्ति जो जिन्दा है आवाज़ दे

जागने का सबको वो पैगाम दे

सूनी पड़ी है धरा कब्रिस्तान सी

चीखो के हर आँख को खुल जाने दे

उठने दो लहरों को ऊँचा इतना

तारों को संग उन के बह जाने दे

लगाओ आग धरा पे ऐसी

के उसमे सूर्य को जल जाने दे

बहाने दो गंगा की धार को हर एक इंच पर

देखो बात सब के पाप को धुल जाने दे रहारहा

धो रहा है सदियों से जो ईंटे

उस मैले कुचैले मजदूर को नहाने दे

आने दो भूचाल ऐसा

काले कल को मिटटी में मिल जाने दे

और जागने के बाद सब के

नया घरोंदा फिर बसाने दे